Wednesday, February 2, 2022

मूल मात्रक & विमीयें

मूल मात्रक:-

 मूल राशियों के वे मात्रक जो एक-दूसरे से पूर्णतया स्वतन्त्र होते हैं तथा इनमें से किसी एक मात्रक को किसी अन्य मात्रक से बदला अथवा उससे सम्बन्धित नहीं किया जा सकता है, मूल मात्रक कहलाते हैं
 जैसे-लम्बाई, द्रव्यमान, समय, वैद्युतधारा, ऊष्मागतिक ताप, ज्योति-तीव्रता तथा पदार्थ की मात्रा मूल मात्रक हैं।...और...

 विमीय समीकरण क्या है:-

किसी भौतिक राशि को उसके विमीय सूत्र के बराबर लिखने पर प्राप्त समीकरण को उस राशि की विमीय समीकरण कहते हैं। अत: विमीय समीकरण वह समीकरण है जिसमें किसी भौतिक राशि को मूल और उनकी विमाओं के पदों में दर्शाया जाता है।...और...

विमीये विश्लेषण की सीमाएं:-

  • परस्पर सम्बन्धित राशियों के बीच सम्बन्ध व्युत्पन्न करने के लिए विमीय विश्लेषण काफी उपयोगी है। तथापि सूत्रों में आये विमाहीन स्थिरांकों के मान इस विधि द्वारा ज्ञात नहीं किए जा सकते।
  • यदि कोई यान्त्रिक भौतिक राशि तीन से अधिक यान्त्रिक भौतिक राशियों पर निर्भर करती है, तो विश्लेषण विधि से उनके बीच सम्बन्ध स्थापित नहीं किया जा सकता; क्योंकि M, L तथा T की घातों की तुलना करने से केवल तीन समीकरण ही प्राप्त होती हैं तथा उनसे तीन घातों के ही मान ज्ञात किये जा सकते हैं
  • इस विधि से त्रिकोणमितीय (sine, cose,....), चरघातांकी (exponential) तथा लघुगणकीय (log x) आदि पद वाली समीकरणों का विश्लेषण नहीं किया जा सकता।...और..


 विमीय विश्लेषण के गुण:-

      1.  इसके द्वारा मात्रकों कि किसी पद्धति में, किसी दी गई भौतिक राशि के मात्रक ज्ञात किए जा सकते हैं | 
      2.  इसके द्वारा किसी भौतिक नियतांक की विमाए तथा मात्रक ज्ञात किए जा सकते हैं |
      3.  इसके द्वारा किसी भौतिक राशि के परिमाण को एक पद्धति से दूसरे पद्धति के मात्रको में बदल सकते हैं | 
      4.  इसके द्वारा किसी दी हुई भौतिक समीकरण की विमिये सत्यता की जांच की जा सकती

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